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अंक के प्रमुख आकर्षण

जून 2016

संपादकीय

टीना डाबी होने का मतलब

युवा संवाद - जून 2016 अंक में प्रकाशित

 

टीना डाबी ने क्यों हलचल मचा रखी है। लगभग हर साल ही सिविल सर्विसेज की परीक्षा में लाखों उम्मीदवार बैठते हैं और हर बार ही कोई न कोई टॉपर घोषित होता ही है। लेकिन इस बार कुछ अलग है। एक तरफ दलित समुदाय खुश है कि आरक्षण का संवैधानिक अधिकार मिलने के 66 सालों बाद यह मुकाम हासिल हुआ है। दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों की बाढ़ आ गई है जो एक तरफ तो इसका...

 

आगे पढ़े...

यह जो बिहार है : गंगा की सिर्फ सांसें अटकी हैं — योगेंद्र

सामयिकी : नवउदारवादी शिकंजे में आजादी... — प्रेम सिंह

कृषि नीति पत्र : वैज्ञानिक अशुद्धियों का पुलिंदा — डॉ. वंदना शिवा

दस्तावेज-3 : लोहिया ने खुद की बहस — श्रीकातं

पनामा पेपर्स : आखिर इसमें छिपा क्या है ? — शिशिर अस्थाना

पनामा पेपर्स : कर चोरी के अभयारण्य में हम — संजय पुगलिया

खाद्य संकंकट : खाद्य उपनिवेशवाद का फैलता... — रमेश कुमार दुबे

परमाणु ऊर्जा : जनतंत्र में जैतापुर — कुमार सुन्दरम

अकाल : कम अकली से पड़ता है अकाल — चतरसिंह जाम

जलविद्युत : खतरे में जैव विविधता — एलिजाबेथ ग्रासमेन

कोकाकोला षडयंत्र : प्लाचीमाड़ा के साथ धोखा... — आर.कृष्ण कुमार

नशाबंदी : नशाबंदी के किंतु परंतु — अशोक कुमार शरण

समाज : हाय रे समाज — गुलशन बानो

संवेदनहीनता : एक लेखक की खुदकुशी पर... — अभिषके श्रीवास्तव

वैश्वीकरण : भूमंडलीकरण : भारतीय नजरिया — एस. पी. शुक्ला

150वीं जयंती : महात्मा गांधी -150 : एक सार्थक... — कश्मीर उप्पल

विशेष रिपोर्ट : जी.एम. सरसों के परीक्षण के बहाने

स्त्री लेखन : बाजार में बाजार के विरुद्ध — डॉ. अर्चना रानी

बेबाक : एक डिग्री का सवाल है बाबा — सहीराम