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अंक के प्रमुख आकर्षण

अप्रैल 2016

संपादकीय

जेएनयू क्या देशद्रोहियों का अड्डा है?

युवा संवाद - अप्रैल 2016 अंक में प्रकाशित

 

जेएनयू को लेकर चल रही बहस में एक सवाल शिक्षा का आया। बहुत सारे लोगों ने पूछा कि यह कौन सी पढ़ाई है जो जेएनयू के छात्र छह-आठ साल तक पढ़ते रहते हैं और तीस की उम्र तक पहुंच जाते हैं। यही नहीं, यह सवाल भी उठा कि जनता के पैसे से क्या जेएनयू के छात्रों को इस बौद्धिक विलास की छूट दी जा सकती है?

 

यह सवाल दरअसल हमारे समाज में शिक्षा को लेकर बने नजरिए पर एक चिंताजनक टिप्पणी करता है। मैकाले ने भारत में पढ़ाई-लिखाई का मकसद क्लर्क पैदा करना

आगे पढ़े...

यह जो बिहार है : बिगड़ रहा है बिहार — योगेंद्र

धर्म : हिंदू धर्म क्या है? — पंडित जवाहरलाल नेहरू

विवेकहीनता : गाय के नाम पर जनतंत्र — वध सुभाष गाताडे

सांप्रदायिकता : अब तो मैं हिंदू भी नहीं... — उदय प्रकाश

दस्तावेज : डाॅ. लोहिया जब आधी रात को... — श्रीकांत

विमर्श : संघ, भारत और लोकतंत्र — अरुण कुमार त्रिपाठी

धर्म/ईश्वर : एक ही ईश्वर है

संस्मरण : मुझे जेएनयू का छात्र रहने पर... — शमशेर सिंह बिष्ट

भारतीय संस्कृति : निर्धनता की संस्कृति — डाॅ. ज्योति सिडाना

भाषा : अंग्रेजी भाषा को भारत ने कैसे... — राहुल वर्मा

कैसा विकास? : जीडीपी और आर्थिक विकास...

दस्तावेज : अपनी आजादी का हम क्या करें? — बलराज साहनी

जांच रिपोर्ट : दादरी कांड-बिसारा गांव...

जी.एम. फसल : बासी कढ़ी में फिर उबाल — भारत डोगरा

राजनीति : दक्षिणपंथी राजनीति की धूमिल... — संदीप पांडेय

खेतों में जहर : विदेशी कंपनियों की साजिश... — बाबूलाल दहिया

ओ.एन.वी. कुरुप : मलयालम साहित्य के सशक्त... — डाॅ. प्रिया ए.