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अंक के प्रमुख आकर्षण
नवीनतम अंक - सितंबर 2018
संपादकीय

सच्चाई को चाहिए आजादी

युवा संवाद - सितंबर 2018 अंक में प्रकाशित

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुर्भावना में ही सद्भावना की बात कह दी है। विपक्ष के आभासी महागठबंधन के लिए उनका यह कहना ठीक है कि वह विकास करने नहीं विरासत बचाने निकला है। निश्चित तौर पर विरासत बुरी चीजों की नहीं अच्छी चीजों की होती है और वह है हमारे स्वाधीनता संग्राम के महान आदर्शों की विरासत। ...

 

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यह जो बिहार है : फिर खस्ताहाल बिहार —  डाॅ. योगेंद्र

धर्मनिरपेक्षता : भारत में धर्मनिरपेक्षता —  चंदना चक्रवर्ती

दृष्टिकोण : विज्ञान बनाम रूढ़िवाद —  पी.एम. भार्गव

अंधविश्वास : नेहरू तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण — पी.एम. भार्गव

हिंदुत्व : वे अतीत का भविष्य गढ़ना चाहते हैं ! — राजेन्द्र धोड़पकर

जवाहरलाल नेहरू : आधुनिक भारत के एक सुलझे हुए...  — नीरज कुमार

गांधी लोकशिक्षण : आजमाइए बापू का लोक शिक्षण — प्रेम प्रकाश

साक्षात्कार : भारत में कभी स्वर्णिम युग नहीं रहा

किसान : बार-बार छले जाते किसान — डाॅ. सुनीलम

एन आर सी : रामबाण नुस्खा नहीं यह — संजोय हजारिका

एन आर सी : उत्तर पूर्व को जलाने की कोशिश — सुनंदा के दत्ता राॅय

कार्ल माक्र्स : एक स्वप्न का यातना में बदल दिया... — अपूर्वानंद

भीड़तंत्र : ये किस देश-समाज के लोग हैं — कुमार प्रशांत

भीड़तंत्र : भीड़ बनता भारत — अरुण कुमार त्रिपाठी

असहमति : न हम प्रश्न पूछते हैं, न तुम्हें पूछने... — अशोक वाजपेयी

स्टीफन हाॅकिंग : शरीर पर मस्तिष्क की विजय — राॅजर पेनरोज

अंधविश्वास : अंधविश्वास के खिलाफ देश की... — युवा संवाद ब्यूरो

बेबाक : कौन गले पड़ रहा है — सहीराम